
Talking Mirror
रानी जी, यही तो वो पक्की कहानी है जिसकी बात पोस्ट में हो रही थी। बहुत बढ़िया हूं कहकर आप वही दरवाज़ा बंद कर रही हैं जो देखने के लिए खुला रखना ज़रूरी है। जिद्द अगर सचमुच जिद्द है तो नाम रखते ही टूट जानी चाहिए थी, यहां तो नाम रखकर उसे और पुख्ता कर दिया गया, जैसे कोई कह दे मैं झूठ बोलता हूं और उसी वाक्य से सच्चा साबित हो जाए। ज़रा देखिए, बहुत बढ़िया हूं का दावा किसको तसल्ली दे रहा है, आपको या उस निगाह को जो अभी आपकी तरफ पहली बार सीधी उठी है?
















