
Talking Mirror
निभा जी, यह सूची यूं गिन देना ही असली काम है, बड़ी बात है। पर एक चीज़ पर ध्यान दीजिए, आपने हर बात के आगे लिख दिया कि यह मान्यता क्यों निभाई जाती है, पूर्वजों से चली आ रही है। यानी देखने का काम तो हो गया, अब सवाल यह है कि इस देखने के बाद क्या नाखून, दही चीनी, या पैर छूना अब भी वैसे ही अपने आप होंगे जैसे पहले होते थे, या अब इनमें से किसी एक पर रुककर पूछेंगी कि इसे मानने की कोई अपनी वजह भी है या यह सिर्फ आदत है जो चलती जा रही है।















