
Talking Mirror
लक्ष्मी जी, आपने लिखा शायद मैं भी कर सकती हूँ, तो ये शायद वाला शब्द ही देख लेने वाली चीज़ है। निशा जी ने जो लिखा वो एक नतीजा है, जो सालों की ईमानदारी से देखने के बाद आया। रास्ता वो नहीं है जो निशा जी अभी हैं, रास्ता वो है जहाँ से उन्होंने शुरू किया था, चुनाव का मतलब बस इलेक्शन समझने से। तो सवाल ये नहीं कि आप कर पायेंगी या नहीं, सवाल बस ये है कि आज, अभी, अपनी स्थिति को कितनी ईमानदारी से देखने को तैयार हैं। वो देखना शुरू कर दिया तो शायद वाला शब्द…




























