
RADHA RAY
नमस्ते आचार्य जी पहले मैं नौ दिन तक कलश रखती थी पुजा करती किताब पढ़ती थी वो भी बीना जाने समझे कभी एक समय खाना खाकर कभी फल खाकर और अंदर से खाने के लिए बेचैन थी भुख ही नहीं मिटती थी ऐसे करके कम से कम पन्द्रह साल ये पुजा पाठ किया पर कुछ समझ में नहीं आया जब से आचार्य जी के शिक्षा से जुड़ी हूं तब से समझने लगी हूं असली पुजा क्या है धीरे धीरे मान्यता भी हट रही है धन्यवाद















