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Gyaneshwari Baghel
मेरे कई फैसले स्वार्थ और डर से तय हुए हैं अब जब समझ से फैसले लेना शुरू किया है तब से ख़ुद में एक नई बदलाव और अच्छी ऊर्जा का आभास हो रहा है। अलार्म बस अपना काम करता हैं लेकिन "मैं" को बचाव करने का बहाना मिल जाता है। क्षणिक भर की खुशी उसके लिए अधिक मायने रखती हैं। किंतु जब वहीं बात एग्जाम के लिए हो तो अपनी अहंकार को जीतने के लिए इस प्रकार उत्साहित होता है कि अगले दिन अलार्म की आवाज़ से भी पहले उठ जाता हैं फ़िर चाहें आँखें बोझिल ही क्यों न हों।















