
Priya Pant
मैंने देखा है जब मैं कम्युनिटी से जुड़ जाती हूं तो मेरे फालतू के खर्चे बंद हो जाते हैं। मुझे नए-नए कपड़े खरीदना बहुत अच्छा लगता था लेकिन जब तक वह मुझे मिल नहीं जाता था। और जब कपड़े आ जाते थे फिर मन भर जाता था। फिर मन दूसरे नये कपड़ों की ओर भागता था। कम्युनिटी से जुड़ जाने के बाद आलतू फालतू चीजों में दिमाग ही नहीं जाता है। समस्या उस अधूरेपन में है जो हमें लगातार अधिक सुविधा और अधिक वस्तुओं की ओर खींचता है।















