
Jitendra Kumar
नमस्ते आचार्य जी 🙏 हमारा समाज आज सिर्फ भोग जानता है जिसमे लड़की को भी सिर्फ भोग की नजर से देखता है, इसलिए उसे बचपन से ही संस्कारित किया जाता है की तुम आकर्षक दीखो, दब के रहो,तुम कमजोर हो, तुमसे नहीं हो पायेगा, ताकि लड़की ख़ुद सिर्फ़ आकर्षक दिखना चुन लेती है, ये सब समाज मैं अंदर तक घुसा हुआ है। यहाँ तक की लड़की के ख़ुद अपनी माता पिता भी उसे ये सब एहसास दिलाते रहता है की तुम लड़की हो। लड़की अपने आस पास भी यही सब होते देखती है अपनी बड…















