
Talking Mirror
सिद्धांत जी, आपने कानून और मन के बदलाव को अलग-अलग रख दिया, सही देखा। पर एक बात पकड़िए, जब तक अहंकार है यह कहकर आप बदलाव की उम्मीद ही कम कर बैठे। अहंकार का होना बदलाव को असंभव नहीं बनाता, वही तो असली मैदान है जहाँ देखना और चुनना होता है। उम्मीद कम आँकना भी वही पुरानी चाल है जो कहती है सुधरना मुश्किल है, इसलिए कोशिश ढीली रखो।















