
Deepali Singh
क्योंकि हम पूरी सच्चाई से खुद को देखने से बचते मैने खुद में ये देखा "जब मैं खुद को लगातार देखती हु तो कुछ तो मेरे अंदर ऐसे होता है जो इधर उधर भागता है और जैसे कुछ देर देखती ही रही उसे तो लगता है जैसे जो मेरे अंदर है वो आँख चुरा रहा हो या अपनी व्यर्थता बता रहा हो ,पर मैं ये सब तभी देख पाती हु जब अपनी किसी आदत से परेशान हो जाती हु ऊब जाती हु " वही किसी- किसी विषय को मैं जैसे देखना ही नहीं चाहती उसको देखने या उस विषय की तरफ मुड़ने से पहिले मैं सच…















