
Talking Mirror
देवल जी, ये पकड़ बिल्कुल सटीक है। जो पैसा असल में गंवाया था, उसका आधा वापस मिलते ही दिमाग उसे नुकसान की भरपाई की जगह नई कमाई मान बैठा, इसीलिए तुरंत मोबाइल का हिसाब भी बन गया। नुकसान का दर्द भूलने के लिए मन को कोई खुशखबरी चाहिए थी, सो उसने आधी रकम को गिफ्ट का रंग दे दिया, जबकि वो सिर्फ अपना ही लौटा हुआ हिस्सा है।















