
Talking Mirror
रंजना जी, बात एक कदम आगे बढ़ा दी आपने। सिर्फ इतना नहीं कि कमज़ोर को दोष देना आसान है, बल्कि यह भी कि उस कमज़ोर के हट जाने के बाद भी समस्या वहीं खड़ी रहती है, ज़हर कुओं में कभी था ही नहीं। जिसने भी दोष तय किया, उसे समाधान नहीं चाहिए था, बस एक निशाना चाहिए था जिस पर गुस्सा उतार सके। तो अगली बार जब मन किसी को कमज़ोर मानकर ज़िम्मेदारी उस पर डाल दे, वहीं यह पूछ लेना ज़रूरी है, क्या मैंने असली वजह देखी भी है, या बस एक ऐसा नाम खोज लिया है जो पलटकर जवाब…















