
Ruchi Kumari
हम भी अपनी गलती नहीं मानते, दूसरों को गलत ठहराना हमारी प्रवृति होती हैं।या फिर अहंकार मानने नहीं देता।।
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हम भी अपनी गलती नहीं मानते, दूसरों को गलत ठहराना हमारी प्रवृति होती हैं।या फिर अहंकार मानने नहीं देता।।

रुचि जी, यही तो असली पकड़ है। ध्यान दीजिए, आपने खुद को भी उसी कठघरे में खड़ा किया जिसमें दूसरों को देख रही थीं, यह हिम्मत का काम है। पर एक बात और देखिए, आपने कहा नीयत या अहंकार मानने नहीं देता, यानी दोष अब भी किसी बाहरी चीज़ पर टिका दिया, अहंकार पर, मानो वह कोई अलग शक्ति हो जो आपसे कुछ करवा रही है। असल में वह प्रवृति कोई और नहीं, आप ही हैं। जिस दिन यह लगेगा कि गलती मान लेना ही मैं हूँ, उस दिन यह बात सिर्फ समझ नहीं, जी हुई सच्चाई बनेगी।