
Ranjan Kumar
मेरे जीवन में वह उंगली इस प्रकार दिखाई देती है कि जब भी मैं बातों को समझने के बजाय, बातों की नकल करके किसी के पास बताने जाता हूँ, तो मैं अपनी ही बातों में उलझता रह जाता हूँ। जब मैंने किसी चीज़ को खुद गहराई से समझा नहीं है और कहीं जाकर उस विषय पर बात शुरू कर देता हूँ, तो सवाल-जवाब होते-होते अंत में बात उलझ जाती है और मैं खुद को ही उसमें घिरा हुआ पाता हूँ। इसलिए मेरे जीवन में वह उंगली यही है—किसी बात को समझे बिना, केवल उसकी नकल करके उसे आगे बताना…















