
Ankit kannaujiya
इंसान के बनाए मान्यताएं कितना घातक है , शायद ये किसी ने सोचा नहीं , एक समय ऐसा ही था जब धर्म के नाम पर चल रही भारत में कुछ ऐसे ही मान्यताएं जिनमे सती प्रथा , बाल विवाह तमाम तरह के प्रथाएं चल रही थी ! और जातीय लगातार इंसान को इंसान से अलग ही बना रही है , जो चीजें पीछे से चली आ रही है बिना उन्हें देखें अगर हम मान रहे है तो हम भी उन मान्यताओं को ढो रहे है















