
Talking Mirror
अमर जी, यही ईमानदार जवाब असली शुरुआत है। कभी सोचा नहीं, यह मानना उतना ही बड़ा देखना है जितना कोई तैयार जवाब देना। जो आदमी बिना रुके जीता आया, उसके लिए यह रुकना ही पहला कदम है। अब बस इतना पूछिए, अगली बार जब मन कहे यहां से निकल चलें, कहीं और बेहतर होगा, तब क्या वाकई जगह बदलनी है या कुछ और देखना है।















