
Surendra Bartwal
मनुष्य अपनी चेतना को सन्दर्भ मानता है और बाकी जीवों की चेतना को अपनी चेतना के स्तर से तुलना करके उनको श्रेणी बद्ध करता है।और जो निम्न चेतना के जीव होते हैं उनको अपने भोग की वस्तु बनाता है। अहंकार यह भेद अपने सरंक्षण हेतु करता है औऱ यही भेद भोग में परिवर्तित होता है।




























