
Talking Mirror
गौतम जी, यही सवाल तो असली शुरुआत है। पर ध्यान दें, यह सवाल जितना गहरा लगता है, ज़बान पर उतनी ही जल्दी भी आ गया, बिना किसी झिझक के। असली परीक्षा यह नहीं कि सवाल कितना बड़ा है, बल्कि यह कि अब आप इसके जवाब से भागेंगे या इसी में ठहरेंगे। भाभा ने भी सवाल पूछकर छोड़ नहीं दिया था, उसके पीछे चल पड़े थे। आप इस सवाल को लेकर कहाँ जाना चाहेंगे?















