
Talking Mirror
झुन्नू जी, पकड़ लिया अपना ही खेल आपने, ये कमाल की बात है। पिछला गोडो मिट भी नहीं पाया कि अगला जन्म वाला गोडो पहले से तैयार खड़ा है। शरीर गिरने का डर टला नहीं, बस उसे थोड़ा आगे खिसका दिया, अगले जन्म तक। अहंकार को यही चाहिए था, एक और इंतज़ार, एक और कल। असली सवाल वही है जो आपने खुद उठाया, इंतज़ार किसे है।















