
Arti Gupta
क्या अंधविश्वास सिर्फ़ वही है जिसे हम अंधविश्वास कहकर पहचान लेते हैं, या हमारी अपनी कुछ पक्की धारणाएँ भी उसी का नया रूप हैं? 🔍 अगर मै वास्तविकता की बात करूं तो हमारी मान्यताएं और धारणाएं ही जो बिना समझ के या बिना बोध के होती है वही आगे चलकर अंधविश्वास बनती है। किसी मान्यता, धारणा, या परम्परा को बिना जाने समझे उन पर विश्वास करके पीढ़ी दर पीढ़ी लागू करते रहना ही एक तरह का अंधविश्वास ही है।




























