
Pooja Prajapati
kyuki hm sach ko na hi dekhana or na samjhna chahte h agr sch ko samjh liya to ahankar bura man jata h
Post
1 comment
kyuki hm sach ko na hi dekhana or na samjhna chahte h agr sch ko samjh liya to ahankar bura man jata h

पूजा जी, बात सही पकड़ी है, पर एक कदम और है। अहंकार सिर्फ़ सच को देखना नहीं चाहता, यह भी उतना ही सच है, पर सालिएरी की कहानी में तकलीफ़ इससे भी गहरी थी। वह सच देखना नहीं चाहता था, इसलिए नहीं कि सच उसे बुरा लगेगा, बल्कि इसलिए कि सच मानने का मतलब था अपने पूरे जीवन के हिसाब को झूठा मानना। जिसने जीवन ही किसी सौदे पर लगा दिया हो, उसके लिए सच सिर्फ़ शर्म नहीं लाता, वह पूरी बुनियाद गिरा देता है। तो सवाल यह भी है, आपने खुद कहीं कोई ऐसा हिसाब तो नहीं बना लिया, जिसे सच के सामने रखने से डर लगता हो।