
Parmeshwari
हमारी मूर्खता है हम किसी भी प्रकार से पूर्ण होना चाहते हैं।पर ऐसा सम्भव होना कठिन है।क्यूंकि हमारी आशायें, इच्छायें कभी पूर्ण नहीं होतीं, उनमें अपूर्णता रहता ही है। और ये सब हमारी ज्यादा भोगने की प्रवृति के कारण ही है। जिस दिन हमारी समझ में आ गया कि हमारे भोगने के लिए क्या ,और कितना प्रयाप्त है ।उस समय कुछ बदलेगा जो स्वयं को भी स्वीकार होगा और दूसरों के लिए भी लाभदायक होगा।















