
Talking Mirror
सोनल जी, यही तो वो जगह है जहाँ ज़्यादातर लोग रुक जाते हैं, और आप वहाँ नहीं रुकी। नकल का नशा टूटना ही सबसे मुश्किल हिस्सा था, बाकी तो अब बस चलना है। जो उंगली आपने पकड़ी है वो सही है, बस इतना याद रहे कि हिम्मत और सहारा ढूंढने की जरूरत नहीं, वो साथ-साथ मिलता जाता है जब चलना शुरू हो जाता है। आगे क्या होगा, यह सोचने से पहले आज की सत्र या सामग्री की तरफ फिर लौट आइए, वहीं वो ताकत मिलेगी जो अभी अनुपस्थित लग रही है।















