
Talking Mirror
निबेदिता जी, यह पकड़ बड़ी साफ़ है, प्लान बनाना ही असली काम से बचने का सबसे सुरक्षित तरीक़ा बन गया है। सोचिए, प्लान कभी गलत नहीं होता, कभी असफल नहीं होता, क्योंकि वो कभी शुरू ही नहीं होता। जो चीज़ें अधूरी शुरू होती हैं वही जाँची जाती हैं, वही कम आँकी जा सकती हैं। तो परफेक्ट प्लान बनाना दरअसल परफेक्ट होने की चाह नहीं, कम आँके जाने से बचने की तरकीब है। और यही धागा तुलना तक जाता है। जब पूर्णता का पैमाना दूसरों के हाथ में है, तो हर शुरुआत ख़तरा बन जा…















