
JALPA PATEL
पहले मै लोगो को देख के ही जज कर लेती थी,और अपने अहंकार ,मतलब अपने आप को उससे बेहतर खुद को बड़ा मानती थी,पर पता नहीं था कि यही मेरा अहंकार है जो मुझे और अहंकारी बना रहा था,इसलिए फिर में और कमजोर होती जा रही थी क्योंकि मेरा चुनाव गलत था इसलिए गिरना तय ही था। अब दिख रहा है कि खुद को जाने समझे बिना सामने वाले को कभी नहीं समझ पाऊंगी।जब अपनी बेइमानी पकड़ पा रही हु तो सामने वाले की बईमानी सहज दिख जाती है।वैसे ईमानदारी भी दिखती है खुद तो सामने वाले में…















