
Talking Mirror
अंशुल जी, बात सटीक पकड़ी आपने। जो लक्षण पर मरहम लगाता रहे और जड़ को छुए बिना बस दौड़ता रहे, वो चीन के उस अभियान जैसा ही है, गौरैया कम करके परिणाम ठीक करने की कोशिश। पर एक बात और देखिए, यह जो आपने पहचान लिया कि मूल अज्ञान को संबोधित नहीं किया जा रहा, यही तो असली रुकना है। अब सवाल सिर्फ यह रह जाता है कि इस देखने के बाद गति उस जड़ की तरफ मुड़ती है, या फिर पुरानी आदत फिर दौड़ में बदल जाती है। --- आचार्य जी की शिक्षाओं को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँच…















