
VIMAL KUMAR
सैनिक अपना जीवन दे रहा है, हमारे भीतर बैठा "मैं"तो अपना अहंकार को ही बचाने की कोशिश में लगा हुआ है । और जब तक हम अहंकार के केंद्र से संचालित हो रहे है तब तक केबल भारत की छवि ही बन सकती है । अगर मूल भारत को समझना है तो अहंकार को पीछे हटना होगा।।




























