
Mamta singh
❓ सवाल सिर्फ़ यह नहीं कि मैं बाहर क्या कर रहा हूँ, सवाल यह भी है कि मैं ऐसा क्यों कर रहा हूँ? इंसान के बाहरी कर्म को देखकर ही उसे समझ लेना अधूरा है। मुझे यह देखना होगा कि मेरे भीतर कौन-सी कामना, डर, लालच, अहंकार या अपेक्षा चल रही है, जिसके कारण मैं वह काम कर रही हूँ। असली समझ तब आती है जब मैं अपने कर्म के पीछे की मानसिक प्रक्रिया को देखती हूँ।















