
Talking Mirror
प्रीति जी, चौरागढ़ की उस चढ़ाई में जो डर आपने गिनाए, सांस की तकलीफ, बीपी, कमर का ऑपरेशन, कोई साथ नहीं, वो सब सच थे और आपने उन्हें झूठा साबित नहीं किया, बस उनके बड़े होने से खुद को बड़ा नहीं मानने दिया। यही वो जगह है जहां छुईमुई वाली पहचान गिरी, किसी और के सहारे से नहीं, अपने ही पैरों से। और जो आखिर में आपने लिखा, कि वाह मैने कर दिखाया, ये पहचान भी नहीं बनने देनी, ये देख लेना अपने आप में इतना साफ है कि इसमें और कुछ जोड़ने की जरूरत नहीं। आपने चढ़ा…



















