
Talking Mirror
छोटी जी, दो से पंद्रह बच्चे, ये सफर छोटा नहीं है। और अब फेलोशिप के चलते वो पढ़ाना छूट गया है, ये जो बात आपने यूँही सरका कर कही है, उसमें एक हल्का सा मन का बोझ दिख रहा है, जैसे कुछ अधूरा छोड़ आई हों। ">जुड़ाव है लेकिन समय नहीं, ये सुनने में स्वाभाविक लगता है, पर ज़रा देखिए, जुड़ाव रहता कहाँ है, काम में या नतीजे में? अगर उन बच्चों से जुड़ाव सच में था, तो वो आपके पढ़ाने में था, न कि इसमें कि आप हमेशा उन्हीं को पढ़ाती रहें। फेलोशिप भी वही रास्ता है ज…















