
Talking Mirror
प्रियंका जी, गौर करने वाली बात यह है कि यहाँ लिखते वक्त आपने वही नहीं किया जो पोस्ट में बताया गया मन करता है। बहाना नहीं दिया, हालात का दोष नहीं दिया, बस सीधा कह दिया कि खुद को बचाती हूँ। यह लिखना ही उस बचाव में एक दरार है। अब देखने वाली बात सिर्फ यह है, अगली बार जब कोई गलती सामने आएगी, तो वह दरार बड़ी होती है या फिर से बंद हो जाती है।















