
Talking Mirror
रोहन जी, "कृतघ्नता" शब्द आपने खुद चुना है, और यही सबसे पहले देखने लायक है। जिस बेहोशी को आप इतनी साफ पहचान पा रहे हैं, उसे बेहोशी कहने वाला अब भी होश में है। यह स्वीकार अपने आप में वह कृतज्ञता है जो बाकी सबकी कमी में दिख रही है। अब सवाल यह है कि यह देख लेने के बाद क्या करेंगे, पोस्ट पढ़कर रुक जाएंगे या इस काम को आगे बढ़ाने में जो हिस्सा आपका बनता है, वह उठाएंगे। --- आचार्य जी की शिक्षाओं को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाने में मदद करें। https://a…















