
Sneh lata
जिसे देखा अब उसे जीने के लिए बेचैनी बढ़ रही है। और आज तक जो सीखा उसे जीवन ही बनाया है। और आगे की सीख भी जीवन बनाना है। इसको ऐसे ही नहीं छोड़ सकते। इसको ऐसे ही छोड़ देना इसका अपमान ही होगा और अपमान होने देना ये उचित नहीं है। इससे घुटन सी महसूस होती है।अब आगे क्या होगा पता नहीं आज तक खतरे उठाय है। और आगे भी यही होगा।जब वक्त यही चाहता है तो यही सही। मैंने रास्ते ही ऐसे चुन रखें है। और वही रास्तों की पुकार चैन नहीं लेने देती।🙏🙏















