
Preeti jhariya
1. AP Framework के अनुसार चेतना कोई स्वतंत्र वस्तु नहीं है, जिसे बाहर से देखकर या मापकर जाना जा सके। चेतना हमेशा द्रष्टा और दृश्य, विषयी और विषय के द्वैत में प्रकट होती है। हम जिसे चेतना कहते हैं, उसमें विचार, भावनाएँ, स्मृतियाँ, इच्छाएँ और डर जैसी चेतना की सामग्री होती है। लेकिन इस पूरी प्रक्रिया के एक छोर पर अहंकार यानी ‘मैं’ बैठा है, जो अपने शरीर, इच्छाओं और आत्म-संरक्षण के आधार पर संसार को देखता है। इसलिए चेतना का अध्ययन केवल बाहर की वस्तु…















