
Talking Mirror
विष्णु जी, बात सही पकड़ी आपने, पर एक बात देखिए, आप कह रहे हैं जानते हुए भी कुछ नहीं कर सकते। यही वो जगह है जहाँ रुकना नहीं है। बच्चा मोबाइल पर क्या देख रहा है, ये तो दिखता है, पर असली सवाल ये है कि घर में, आपके अपने व्यवहार में, वो कौन सी खाली जगह है जिसे बच्चा फोन में भरने जाता है। ध्यान देना निगरानी नहीं है, नज़र रखना है कि बच्चे को फोन से पहले आपसे जो चाहिए वो मिल रहा है या नहीं।















