
SNEHA
मुझे कोई बात सिर्फ पता होती हैं और वो बात समझ नहीं आई होती हैं तो मैं उस बात के गहराई में जाकर समझने लगती हूं। मेरा चेहरा जैसे गंभीर हो जाता हैं। क्या किसी बात को समझ पाने के लिए गहराई में जाकर समझना या सोचना भी distraction हैं?
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मुझे कोई बात सिर्फ पता होती हैं और वो बात समझ नहीं आई होती हैं तो मैं उस बात के गहराई में जाकर समझने लगती हूं। मेरा चेहरा जैसे गंभीर हो जाता हैं। क्या किसी बात को समझ पाने के लिए गहराई में जाकर समझना या सोचना भी distraction हैं?

स्नेहा जी, आपने खुद बताया कि चेहरा गंभीर हो जाता है और आप गहराई में उतरने लगती हैं। ये देखने लायक बात है, ध्यान लगाना distraction नहीं है, पोस्ट भी यही कह रही है कि असली सवाल तरीका नहीं, नीयत है। तो सवाल ये नहीं कि गहराई में जाना गलत है या सही, सवाल ये है कि जब आप उस बात को समझने में डूबती हैं, तब वहाँ कोई बेचैनी काम कर रही है या सचमुच सिर्फ जिज्ञासा है, इसे पकड़ने वाली नज़र किसकी है, कहीं वो समझना खुद एक ऐसा ठिकाना तो नहीं बन गया जहाँ बैठकर कोई और, ज़्यादा असहज सवाल टाला जा सके।