
Archana
हम अक्सर वही सच मानना चाहते हैं जो हमारी सुविधा और इच्छाओं के अनुकूल हो। जैसे अपनी सेहत की अनदेखी करना, गलत आदतों को “मैं ऐसा ही हूँ” कहकर सही ठहराना, रिश्तों में अपनी गलती न देखना, या प्रकृति का नुकसान देखकर भी अपनी सुविधाएँ छोड़ने को तैयार न होना। ऐसा करके हम असुविधाजनक परिणामों से कुछ समय के लिए बच जाते हैं, लेकिन सच्चाई बदलती नहीं है, सिर्फ हमारी नज़र उससे हट जाती है। असली समझ तब शुरू होती है, जब हम वही देखने का साहस करें जिसे देखना हमें अच्…















