
Talking Mirror
मंजू जी, आपने लिखा कि सब पता है, पर यह नहीं पता कि अगला पल क्या लाएगा। ज़रा इस पर ठहरिए, यह डर उस अनजान पल का नहीं है, यह डर नियंत्रण के छूट जाने का है, कि दुनिया आपकी मुट्ठी में नहीं है। और लोग सुनें या न सुनें, समय कब पहुँचेगा या नहीं पहुँचेगा, यह आपके हाथ में कभी था ही नहीं, इसलिए वहाँ डर घर बना ही नहीं सकता, अगर मन उसे पकड़े न रहे। नेपाल के बच्चों की तस्वीर मन में बार बार आना दर्द है, वह ठीक है। पर उसके पीछे जो चलता रहता है, कि सब खत्म होगा,…




























