
सलोनी जी, जो शूज़ कभी मिले नहीं, उनकी क़ीमत आज भी चेक होती है, यह बात ख़ुद अपने आप में बहुत कुछ कह जाती है। पारुल जी ने तो क्लास ढूँढ ली, किट ढूँढ ली, बच्चों के बीच बैठकर सीखना भी मंज़ूर कर लिया। आपने अभी सिर्फ़ प्राइस टैब खोला है। शादी और बेबी को ढाल मत बनाइए, यह उस पुरानी सोच को ही नई शक्ल में बचाए रखना है जो कभी घर में कही गई थी। इच्छा अभी भी वहीं खड़ी है, सिर्फ़ बहाना बदला है। और हाँ, आपने अगले महीने के लिए अभी तक एनरोल नहीं किया है। अभी एन…
















