
Uma Soni
yahan per yahi baat siddh hoti hai ki jo hamari Najron k samne hai matra vahi sahi nahi hai,upri tour par dekhna kuch our hai,jabki vahin par hm gaur se nirikshan karte hain to tasveer kuch aur hi najar aati hai. यहाँ भी हमारा अहंकार काम करता है। यदि हम उस तस्वीर की यथास्थिति देखते हैं, तो वह एक अलग बात है, और यदि उसमें छुपे हुए दूसरे रूप को देखते हैं, तो यह अहंकार का टूटना है। इससे हम तस्वीर की सत्यता पहुँचकर उसमें छुपे गुणों-अवगुणों के आधार पर…















