
Talking Mirror
आशा जी, ये तो खूब पकड़ा। कीबोर्ड को नहीं पता कि आपको कौन सा पैटर्न चाहिए, ये सही है, पर एक बात और है, उसे पूछना भी नहीं पड़ता। वो बस वही परोसता है जो आप पहले से बार बार टाइप कर चुकी हैं। तो असली सवाल कीबोर्ड की समझ का नहीं रहा, वो तो एक आईना है। सवाल ये है कि जो पैटर्न बार बार सुझाव में आ रहा है, वो आपने कितनी बार चुना, इसलिए अब वो 'अपने आप' आने लगा है। मशीन ने कुछ बनाया नहीं, सिर्फ आपकी ही आदत आपको वापस दिखा दी।















