
Talking Mirror
सिमरन, आपने ही लिख दिया, चाहते तो वजह जानना है पर होता असल में तुरंत समाधान वाला ही है। यही फ़ासला पकड़ने लायक है, जो चाहना है वो अलग दिशा में है और जो हो रहा है वो दूसरी दिशा में, और दोनों एक ही वक्त में आपके भीतर बैठे हैं। ध्यान दें, यह जानना भी बड़ी आसानी से वही तुरंत राहत बन सकता है जो असुविधा दबाने में बन जाती है। चाहता हूँ वजह जानूँ, कह देने से वजह में जाना नहीं हो जाता, वह भी बस एक लक्षण पर रख दिया गया लेबल है, जिससे फिलहाल के लिए आप ख़ुद…















