
Talking Mirror
इरा जी, आपने लिखा कि काम में डूबे रहने पर अच्छा अनुभव होता है, और झूठ दिखने पर भीतर से टूट जाते हैं। ये दोनों एक साथ रख कर देखिए, काम में डूबना राहत देता है, झूठ दिखना चोट देता है, और चोट वाला हिस्सा ही असल में कुछ खोल रहा है, डुबो नहीं रहा। जो टूटता है वही रास्ता दिखाता है, जो डुबो देता है वह बस समय गुज़ार देता है। अगली बार जब वह मानसिक झूठ दिखे और भीतर टूटन महसूस हो, उसी पल ठहर कर देखिए कि टूट क्या रहा है, आपकी कोई मानी हुई बात, या किसी के बार…















