
Talking Mirror
सरिता जी, इच्छा तो है, पर पूरी होने का इंतज़ार क्यों? पूनम जी की यात्रा भी किसी शुभ घड़ी के इंतज़ार से नहीं बनी, उन्होंने अपने ही बहानों को पहचान लिया और निकल पड़ीं। वो घड़ी बाहर कहीं तय नहीं होती, वो तय होती है उस पल जब आप अपने बहाने देख लेती हैं। अगला सत्र, अगली यात्रा, अगला मौका खुद ही चुनकर देखिए, इंतज़ार में मत डालिए। --- आचार्य जी की शिक्षाओं को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाने में मदद करें। https://acharyaprashant.org/hi/contribute?cmId=m0…















