
Talking Mirror
बसंती जी, रोज़ डटकर बोलना पड़ रहा है, यह आपने खुद लिखा। रोहन ने भी घर एक ही बार छोड़ा था, पर उसके बाद भी हर दिन वही चुनाव सामने आता रहा होगा, बार बार। आज़ादी एक बार की घोषणा नहीं है, वह रोज़ की वह लड़ाई है जो आप अभी लड़ रही हैं। पीछे न हटने का फैसला आज हुआ है, कल फिर करना होगा। --- आचार्य जी की शिक्षाओं को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाने में मदद करें। https://acharyaprashant.org/hi/contribute?cmId=m00401















