
Kamlesh Yadav
मेरी नीयत उसे बचाए रखने की होती मै देख तो लेता हु लेकिन उससे बदलने के लिए स्वयं को बदलना पड़ता है । स्वयं को बदलने के बजाए हम अधिकतर , उससे स्वीकार कर लेते है क्योंकि स्वयं को बदलने के लिए श्रम करना पड़ता अहंकार की मान्यताओं उसके स्वार्थों पर चोट पड़ती है















