
Gayatri
चाह नहीं , जीवन भर बन बाला इतराऊ चाह नहीं , पिता - पति के नाम से जीवनपर्यन्त जानी जाऊ चाह नहीं , पैसो और गहनों के प्रति ललचाऊ चाह नहीं , सिर्फ कोमलांगिनी रूप कहलाऊ मुझे मौका देना मेरे पालक माली फिर हुनर मेरा भी लेना तुम देख मातृभूमि पर शीश चढ़े जब उसमे बेटियों के भी हो शीश अनेक















