
Pardeep Kumar
शरीर तो सिर्फ सुविधा ही चाहता है लेकिन हम सिर्फ शरीर नहीं हैं । अगर शरीर के हिसाब से ही चलना है तो फिर हममें और पशु में कोई अंतर ही नहीं रहेगा । शरीर की अपनी वृत्तियाँ होती है । उनको सिर्फ विरोध नहीं करना है लेकिन उन पर चलना भी नहीं है । विवेक से ये फैसला लेना है कि कौन सी बात शरीर की माने या कौन से इग्नोर करें ।















