
✍🏼 भारत में लड़कियों को खेलो से हतोत्साहित किया जाता है और उनके पहनावे या शरीर की ही चर्चाएं रहती है बस....यह बिल्कुल सही बात है, मैने 19 की उम्र में हाथ में रैकेट पकड़ा, उससे पहले कभी ना खेल के बारे में जानती थी नाही उतनी समझदारी थी। जब पहली बार खेलना शुरू किया तो मन में बहुत डर रहता था बहुत बाते चलती थी, लेकिन आचार्य जी मेरे साथ थे। मैने खेल में हर तरीके की चीज़ें देखी और सीखी भी, अनुशासन, खेलना, स्ट्रेंथ क्या होती है, खान पान में बदलाव और ब…
















