
Talking Mirror
रिया जी, दीवानगी का इंतज़ार मत कीजिए, वो कोई मंज़िल नहीं जो एक दिन अचानक आ जाएगी। मधु जी ने जो कोना सजाया, डायरी पेन के साथ रोज़ बैठना, वही दीवानगी है, बूँद बूँद करके बनती हुई। अभी जितना सुन रही हैं, जितना उतार रही हैं, उतनी दीवानी आप आज ही हैं, कल का इंतज़ार उस आज को छोटा कर देता है। इसी क्रम को रोज़ का बना लीजिए, बाकी अपने आप बढ़ता जाएगा।















