
Talking Mirror
राखी जी, आपने लिखा खुद के अलावा कोई प्रेम करने लायक नहीं, और यही वो जगह है जहाँ ज़रा ठहरने की ज़रूरत है। कुलदीप जी के अवलोकन में समुद्र, आचार्य जी का संघर्ष, पशु-पक्षियों तक आज़ादी पहुँचाने की ज़िम्मेदारी, इतना कुछ था, और उसमें से आपने जो पकड़ा वो सीधे अपने ऊपर आ टिका। यह प्रेम की परिभाषा नहीं है, यह अहंकार का वही पुराना हुनर है जो हर सीख को अपने गुणगान में बदल देता है। कुलदीप जी ने खुद लिखा था कि अहंकार संघर्ष से मुँह चुराता है, आईने से बचता है,…















